तेरी आँखों में मेरा घर है
शीर्षक: तेरी आँखों में मेरा घर है
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| तेरी आँखों में मेरा घर है |
तेरी आँखों में मेरा घर है,
यही बात मैं दुनिया से कभी कह न सका।
लोग पूछते रहे—
"तुम्हारा पता क्या है?"
और मैं हर बार
तेरी आँखों की ओर देखकर
चुपचाप मुस्कुरा देता था।
क्योंकि मेरा घर
ईंटों और पत्थरों से नहीं बना,
वह बना था
तेरी मासूम मुस्कान,
तेरे भरोसे,
तेरे स्पर्श
और तेरी आँखों में छिपे
उस अनंत अपनापन से,
जिसने मुझे पहली ही मुलाकात में
अपना बना लिया था।
जब पहली बार
मैंने तुझे देखा था,
दुनिया अपनी रफ्तार से चल रही थी।
लोग अपनी-अपनी मंजिलों की ओर भाग रहे थे,
लेकिन मेरी घड़ी
उसी पल ठहर गई थी।
तेरी आँखों में
जैसे कोई शांत झील थी,
जिसमें आसमान उतर आया था।
उनमें कोई शोर नहीं था,
कोई दिखावा नहीं था,
बस एक सुकून था,
जो बरसों से भटकते
मेरे मन को
पहली बार मिला था।
मैंने उसी दिन समझ लिया था,
कुछ लोग
ज़िंदगी में मिलने नहीं,
बसने आते हैं।
तू भी शायद
ऐसा ही कोई मौसम था,
जो मेरे सूखे दिल पर
पहली बारिश बनकर बरसा था।
तेरी आँखें
सिर्फ आँखें नहीं थीं,
वे मेरे सपनों की खिड़कियाँ थीं।
जब भी मैं उनमें देखता,
मुझे अपना भविष्य दिखाई देता।
एक छोटा-सा घर,
जिसकी खिड़कियों पर
सुबह की धूप खेलती,
जहाँ शाम को
तेरी हँसी चाय की भाप में घुल जाती,
और रातें
हमारी बातों से महक उठतीं।
मैंने कभी
महलों की ख्वाहिश नहीं की।
मैंने कभी
शहरों की चमक नहीं माँगी।
मैंने सिर्फ इतना चाहा
कि जब भी दुनिया मुझे थका दे,
मैं तेरी आँखों में लौट आऊँ।
क्योंकि वहीं
मेरा घर था।
वक़्त बदलता गया।
रास्ते बदलते गए।
लोग बदलते गए।
लेकिन तेरी आँखों में
वह अपनापन कभी नहीं बदला।
जब मैं हारकर लौटता,
तू कुछ कहती भी नहीं थी।
बस एक बार
मुझे देख लेती थी।
और जाने कैसे
मेरी सारी थकान
तेरी नज़रों में उतर जाती।
तेरी खामोशी
दुनिया के सबसे लंबे भाषण से भी
ज़्यादा समझदार थी।
तूने कभी नहीं कहा—
"मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
लेकिन तेरी आँखों ने
हर बार यही कहा।
जब दुनिया ने
मेरी कमियाँ गिनाईं,
तेरी आँखों ने
मेरी अच्छाइयाँ याद दिलाईं।
जब लोगों ने
मुझे गिरते देखा,
तेरी आँखों ने
मुझे उड़ते हुए देखा।
यही तो प्रेम है।
जहाँ शब्दों की ज़रूरत
धीरे-धीरे खत्म हो जाती है,
और नज़रें
पूरी किताब बन जाती हैं।
कई बार
मैंने सोचा,
अगर एक दिन
हम बिछड़ गए तो?
क्या तब भी
तेरी आँखों में
मेरा घर रहेगा?
या समय
उस घर का पता बदल देगा?
यह सोचकर
दिल काँप उठता था।
क्योंकि इंसान
हर चीज़ खो सकता है,
लेकिन अपना घर खो दे,
तो वह अंदर से उजड़ जाता है।
एक दिन
वह डर सच हो गया।
हालात ने
हमारे रास्ते अलग कर दिए।
तू दूर चली गई।
शहर वही रहा,
आसमान वही रहा,
चाँद वही रहा,
लेकिन मेरी दुनिया
अजनबी हो गई।
मैंने बहुत कोशिश की
कि तुझे भूल जाऊँ।
नई राहें चुनीं,
नए चेहरे देखे,
नई जगहों पर गया।
लेकिन जहाँ भी गया,
हर आईना
तेरी आँखों की याद दिलाता रहा।
हर बारिश में
मुझे तेरी पलकों की नमी दिखी।
हर सुबह में
तेरी मुस्कान की रोशनी थी।
हर रात में
तेरी आँखों का चाँद।
तब समझ आया,
कुछ लोग
जिंदगी से चले जाते हैं,
लेकिन दिल से नहीं।
मैं आज भी
उसी पुराने रास्ते से गुजरता हूँ,
जहाँ पहली बार
हमारी नज़रें मिली थीं।
हवा आज भी
वही गीत गुनगुनाती है।
पेड़ आज भी
वैसे ही झूमते हैं।
लेकिन अब
उन रास्तों पर
मेरे साथ सिर्फ यादें चलती हैं।
कभी-कभी
रात के सन्नाटे में
मैं आसमान से पूछता हूँ—
"क्या वह भी
मुझे याद करती होगी?"
तारे
कुछ नहीं कहते।
चाँद
बस मुस्कुरा देता है।
शायद उसे पता है,
सच्चे प्रेम का
कोई अंत नहीं होता।
वह बस
रूप बदल लेता है।
कभी याद बन जाता है,
कभी दुआ,
कभी कविता,
और कभी
आँखों की नमी।
मैंने अब
तुझसे कोई शिकायत नहीं रखी।
अगर तेरी खुशी
किसी और रास्ते पर है,
तो मैं उस राह के लिए भी
दुआ करता हूँ।
क्योंकि प्रेम
पाने का नाम नहीं,
चाहने का नाम है।
और मैंने
तुझे पूरे दिल से चाहा है।
अगर अगले जन्म जैसी
कोई बात सच होती है,
तो मैं भगवान से
बस एक ही प्रार्थना करूँगा—
मुझे फिर से
तेरी आँखों तक पहुँचा देना।
बाकी रास्ता
मैं खुद तय कर लूँगा।
फिर से
उसी पहली मुस्कान से
अपनी दुनिया बसाऊँगा।
फिर से
उसी भरोसे को
अपनी पहचान बनाऊँगा।
और अगर
उस जन्म में भी
हमें बिछड़ना लिखा होगा,
तो कम-से-कम
कुछ पल के लिए ही सही,
मुझे फिर से
तेरी आँखों में
अपना घर मिल जाए।
आज लोग
मुझसे पूछते हैं—
"क्या तुम्हारे पास
अब भी कोई सपना है?"
मैं मुस्कुराकर कहता हूँ—
"हाँ,
एक सपना अब भी ज़िंदा है।"
कि किसी शाम,
किसी मोड़ पर,
अचानक
तुम फिर से मिलो।
हम दोनों
कुछ न कहें।
बस एक पल के लिए
हमारी नज़रें मिलें।
और मैं
एक बार फिर
उसी पुराने घर में
लौट जाऊँ,
जहाँ कभी
मेरे सारे डर खत्म हो जाते थे।
जहाँ मेरी हर हार
जीत बन जाती थी।
जहाँ मेरी हर उदासी
मुस्कान में बदल जाती थी।
जहाँ मेरी हर दुआ
तुम्हारी पलकों पर
सज जाती थी।
क्योंकि सच तो यही है—
दुनिया में
बहुत से मकान होते हैं,
बहुत से शहर होते हैं,
बहुत से पते होते हैं।
लेकिन घर
सिर्फ एक होता है।
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| तेरी आँखों में मेरा घर है |
और मेरा घर
आज भी
किसी गली,
किसी शहर,
किसी नक्शे में नहीं मिलता।
वह आज भी
तेरी आँखों में बसता है।
वहाँ आज भी
मेरी उम्मीदें रहती हैं,
मेरे सपने साँस लेते हैं,
मेरी दुआएँ खिलती हैं,
और मेरा प्रेम
हर रोज़
नई सुबह की तरह जन्म लेता है।
अगर कभी
तुझे मेरी याद आए,
तो एक बार
आईने में अपनी आँखों को देखना।
हो सकता है
तुझे वहाँ
एक मुस्कुराता हुआ मुसाफ़िर दिखाई दे।
वह मैं हूँ...
जो आज भी
कहीं और नहीं रहता।
क्योंकि
तेरी आँखों में ही मेरा घर है।
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